花几万上“儿童情商培训”,靠不靠谱
家长对效果说法不一,记者随机调查30位家长,仅3人愿意掏钱女老板办情商培训班半年就关门,亏了上百万,她说家长也不傻
儿童节快到了,最近关于儿童情商培训的话题很热,花费上万元给孩子报班“补”情商?到底是刚需还是焦虑?
“情商”这个词,大家并不陌生,但和“少儿”“培训”这些联系在一起,问题就来了:
情商还能从小进行模式化培训吗?培训什么内容,怎么收费?家长愿意买单吗?这种培训是不是在玩概念搞噱头?
钱江晚报记者走进杭州几家情商培训机构探个究竟。
家长对效果说法不一,记者随机调查30位家长,仅3人愿意掏钱
女老板办情商培训班半年就关门,亏了上百万,她说家长也不傻
费用一年一万五起,真掏钱的不多
钱报记者了解到,杭州有关于少儿的情商培训机构,大致分为两类,一是专门做情商培训的,二是与口才或感统教育等在一起的。这往往从机构的名字就能看出,诸如情商乐园、情商口才学校、情商成长乐园、情商感统中心等。总体而言,与其他学科类辅导机构或音乐舞蹈等才艺类机构相比,情商培训机构比较少,尤其专做情商培训的,更小众。
此外,记者在网上搜索情商培训时,跳出来最多的是加盟广告,往往是“加盟某某情商培训,不愁招生轻松创业”等信息。
记者走访发现,这些机构对外宣传时,往往强调,都是小班化教学,有系统课程,有专业的老师;而个性就是突出各自的卖点,有突出口才表达的,有突出舞台表现的,有突出帮家长解决孩子爱发脾气、不合群等问题的,总之都能提高孩子的情商。
至于培训费用,记者了解到,一般一年起报,每周一次课,全年48节课左右,费用一年一万五起步,贵的两万出头,全部培训内容大概需要两年完成。有机构表示:“基本是这个市场行情,都差不多,连报两年稍微优惠一点。”
这费用并不低,到底有多少家长愿意买单?记者随机调查了近30位孩子家长:
“我不会,我不相信情商能培训出来,有这个钱还是上个别的兴趣班实在。”
“我会,我认为情商教育很重要,如果培训老师够专业,我愿意花这个钱去学学。”
“我不太了解这种培训,去体验下我是愿意的,上不上得看情况。”
答案基本是这三类,不去的占多数。只有三个人明确说会,两个是小学低年级男孩的妈妈,表示儿子性子急,不听话;一个是幼儿园中班小朋友的爸爸,说女儿太内向。
有妈妈坦言父母不改变培训再多也白搭
什么是高情商,经过培训后会是一个怎样的效果?
“能很好地管理自己的情绪。”“勇于表达自我、外向、受欢迎。”“懂得自我压力疏导,有较强的适应能力”“敢说想说会说巧说”……
各机构的宣传语是让家长向往的,但实际效果到底如何呢?
“我们儿子已经上了近两年的情商培训课了,这是最后一个学期了,我觉得还是有效果的,他现在不像以前那么乱发脾气了。”在一情商培训中心,一位妈妈正在等四年级的儿子下课。
这位妈妈介绍,她们是连报了两年,费用3万5,“当时一次性交钱也觉得挺贵,有点心疼的,但那时对儿子真是头大,他脾气特别急,情绪一上来就会爆发‘母子大战’,简直家无宁日,正好看到这家机构的宣传,就来体验了下,我和他爸爸觉得老师挺专业,就决定上了,为了儿子好,花钱也值。”
下课了,儿子要玩一会积木再走,他转身去拿积木时,记者故意抢坐了这个男孩的椅子,“那是我的位子,”这个男孩站在记者面前,看我没反应,他又说,“这是我的椅子,能还给我吗?”
妈妈笑了起来:“他脾气比以前好多了,以前的话说不定要动手了。其实这么些时间,我最大的感触是,关键在于家长能否改变。我说儿子脾气急,其实是我急,两个人一起急,那就是急上加急,如果父母不配合,不改变一些做法,那光靠孩子一周来上一次课,上再多也白搭。有朋友问我时,我的建议是,有时间精力有一定经济条件的,上情商培训算是锦上添花。但孩子没特别严重的问题,家庭教育就够了。”
她说,情商培训中心每次课后会有20分钟的家长时间,会告诉他们需要配合的事项,另外也会给家长做些指导。
对此,知子花家庭教育高级讲师李庆利老师表示,孩子的情商教育是很需要,但也真没商业宣传得那么玄乎,其实学校里日常就有教育,家庭里更可以熏陶浸染,如果父母的管教就是敲桌子砸板凳,呼来喝去,那孩子上什么班都没用。
Thursday, May 30, 2019
Wednesday, May 22, 2019
Тереза Мэй согласилась на голосование о новом референдуме по "брекситу"
Премьер-министр Британии Тереза Мэй объявила, что согласна провести в Палате общин голосование о втором референдуме по "брекситу". Это - одна из уступок, при помощи которых премьр надеется все-таки провести через парламент трижды отвергнутое им соглашение о выходе из Евросоюза.
Премьер-министр Тереза Мэй во вторник объявила, что ее кабинет готов пойти на определенные компромиссы, чтобы убедить депутатов все-таки проголосовать за проект соглашения о выходе, и один из этих компромиссов - голосование по вопросу о том, проводить или не проводить новый референдум.
При этом, по словам Мэй, положение о референдуме будет включено в проект постановления парламента относительно соглашения с ЕС - то есть, премьер-министр таким образом приглашает противников выхода из ЕС, выступающих за второй референдум, одновременно проголосовать и за референдум, и за выход из Евросоюза на условиях, прописанных в соглашении.
"Я обращаюсь к тем депутатам, кто хочет провести второй референдум, чтобы утвердить соглашение с ЕС - для этого вам понадобится соглашение, и, сответственно, постановление об одобрении соглашения", - сказала Мэй.
Между тем большинство тех депутатов, что выступают за референдум, добиваются именно отмены "брексита": они надеются, что теперь британский народ, узнав, с какими трудностями связан "брексит", проголосует против выхода.
Тереза Мэй намерена предпринять четвертую попытку провести через парламент проект соглашения о выходе из ЕС на первой неделе июня.
После этого Мэй обещает, вне зависимости от исхода голосования, сообщить однопартийцам, когда она уйдет в отставку. Предполагается, что Мэй покинет посты главы Консервативной партии и премьер-министра в течение лета.
По мнению большинства британских комментаторов, шансы на прохождение проекта соглашения с ЕС в Палате общин с четвертой попытки крайне малы: оппозиция, с одной стороны, и жесткие брекзитеры-тори, с другой, не удовлетворятся предложенными компромиссами и все равно проголосуют против.
Последние несколько недель правительство Мэй вело переговоры с руководством главной оппозиционной партии, Лейбористской. Декларированной целью переговоров был поиск компромисса относительно выхода из Евросоюза, но на прошлой неделе они закончились ничем.
Премьер-министр Тереза Мэй во вторник объявила, что ее кабинет готов пойти на определенные компромиссы, чтобы убедить депутатов все-таки проголосовать за проект соглашения о выходе, и один из этих компромиссов - голосование по вопросу о том, проводить или не проводить новый референдум.
При этом, по словам Мэй, положение о референдуме будет включено в проект постановления парламента относительно соглашения с ЕС - то есть, премьер-министр таким образом приглашает противников выхода из ЕС, выступающих за второй референдум, одновременно проголосовать и за референдум, и за выход из Евросоюза на условиях, прописанных в соглашении.
"Я обращаюсь к тем депутатам, кто хочет провести второй референдум, чтобы утвердить соглашение с ЕС - для этого вам понадобится соглашение, и, сответственно, постановление об одобрении соглашения", - сказала Мэй.
Между тем большинство тех депутатов, что выступают за референдум, добиваются именно отмены "брексита": они надеются, что теперь британский народ, узнав, с какими трудностями связан "брексит", проголосует против выхода.
Тереза Мэй намерена предпринять четвертую попытку провести через парламент проект соглашения о выходе из ЕС на первой неделе июня.
После этого Мэй обещает, вне зависимости от исхода голосования, сообщить однопартийцам, когда она уйдет в отставку. Предполагается, что Мэй покинет посты главы Консервативной партии и премьер-министра в течение лета.
По мнению большинства британских комментаторов, шансы на прохождение проекта соглашения с ЕС в Палате общин с четвертой попытки крайне малы: оппозиция, с одной стороны, и жесткие брекзитеры-тори, с другой, не удовлетворятся предложенными компромиссами и все равно проголосуют против.
Последние несколько недель правительство Мэй вело переговоры с руководством главной оппозиционной партии, Лейбористской. Декларированной целью переговоров был поиск компромисса относительно выхода из Евросоюза, но на прошлой неделе они закончились ничем.
Thursday, April 25, 2019
तस्वीरों मेंः धमाकों के तीन दिन बाद श्रीलंका
ईस्टर संडे को हुए सीरियल बम धमाकों के बाद पूरे श्रीलंका में मातम पसरा हुआ है. कुमारी फर्नांडो ने सेंट सेबेस्टियन चर्च में हुए धमाकों में अपने दो बच्चों और पति को खो दिया.
बुधवार को हुए सामूहिक अंत्येष्टि में शवों को दफ़नाते समय उनका सब्र टूट गया.
चर्चों और होटलों में हुए आठ धमाकों में अबतक 359 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है जबकि 500 लोग घायल हुए हैं.
श्रीलंकाई प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने कहा कि इन विस्फ़ोटों से इस्लामिक स्टेट (आईएस) को जोड़ा जा सकता है.
धमाकों की ज़िम्मेदारी आईएस ने ली है लेकिन इसका कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं दिया है, जैसा कि वो करता रहा है.
और हमलों की आशंका में पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और नाके लगाकर वाहनों और लोगों की चेकिंग की जा रही है.
श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना ने सुरक्षा बल और पुलिस का पुनर्गठन करने का संकल्प लेते हुए बताया कि इस हमले को लेकर कोई चेतावनी पहले साझा नहीं की गई थी.
रॉरेन कैंपबेल और उके पति नील इवांस इन धमाकों में मारे गए आठ ब्रितानी नागरिकों में शामिल हैं. मृतकों में 38 नागरिक हैं.
भारत के 11 नागरिकों के मारे जाने की पुष्टि हुई है जिनमें जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) के कार्यकर्ता भी शामिल हैं.
धमाका इतना ज़बरदस्त था कि चर्च की छतें तक उड़ गईं. पुलिस ने बताया कि चर्चों और होटलों में हुए इन बम धमाकों में अब तक नौ में से आठ हमलावरों की पहचान कर ली गई है. यह भी बताया गया कि इनमें से एक महिला हैं और कोई भी हमलावर विदेशी नहीं है.
पुलिस ने अब तक 60 से अधिक संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया है. आगे किसी हमले को रोकने के लिए आपातकाल लगाया गया है.
कोलंबो के बौद्ध विहार में दिवंगत लोगों के लिए शांति प्रार्थना आयोजित की गई. इस घटना से पूरे दुनिया में शोक की लहर है और प्रर्थना सभाएं और कैंडल मार्च निकाले जा रहै हैं.
बुधवार को हुए सामूहिक अंत्येष्टि में शवों को दफ़नाते समय उनका सब्र टूट गया.
चर्चों और होटलों में हुए आठ धमाकों में अबतक 359 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है जबकि 500 लोग घायल हुए हैं.
श्रीलंकाई प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने कहा कि इन विस्फ़ोटों से इस्लामिक स्टेट (आईएस) को जोड़ा जा सकता है.
धमाकों की ज़िम्मेदारी आईएस ने ली है लेकिन इसका कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं दिया है, जैसा कि वो करता रहा है.
और हमलों की आशंका में पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और नाके लगाकर वाहनों और लोगों की चेकिंग की जा रही है.
श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना ने सुरक्षा बल और पुलिस का पुनर्गठन करने का संकल्प लेते हुए बताया कि इस हमले को लेकर कोई चेतावनी पहले साझा नहीं की गई थी.
रॉरेन कैंपबेल और उके पति नील इवांस इन धमाकों में मारे गए आठ ब्रितानी नागरिकों में शामिल हैं. मृतकों में 38 नागरिक हैं.
भारत के 11 नागरिकों के मारे जाने की पुष्टि हुई है जिनमें जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) के कार्यकर्ता भी शामिल हैं.
धमाका इतना ज़बरदस्त था कि चर्च की छतें तक उड़ गईं. पुलिस ने बताया कि चर्चों और होटलों में हुए इन बम धमाकों में अब तक नौ में से आठ हमलावरों की पहचान कर ली गई है. यह भी बताया गया कि इनमें से एक महिला हैं और कोई भी हमलावर विदेशी नहीं है.
पुलिस ने अब तक 60 से अधिक संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया है. आगे किसी हमले को रोकने के लिए आपातकाल लगाया गया है.
कोलंबो के बौद्ध विहार में दिवंगत लोगों के लिए शांति प्रार्थना आयोजित की गई. इस घटना से पूरे दुनिया में शोक की लहर है और प्रर्थना सभाएं और कैंडल मार्च निकाले जा रहै हैं.
Thursday, April 11, 2019
कांग्रेस का आरोप- राहुल को लेजर लाइट से टारगेट किया; एसपीजी ने कहा- यह मोबाइल की लाइट थी
अमेठी. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को अमेठी से नामांकन भरा। नामांकन के बाद राहुल प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। इस दौरान उनके माथे पर कई बार हरे रंग की लाइट दिखाई पड़ी। कांग्रेस ने इसे सुरक्षा में बड़ी खामी करार दिया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अध्यक्ष को टारगेट किया जा रहा था। स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) के डायरेक्टर ने जांच के बाद गृह मंत्रालय को बताया कि यह मोबाइल की हरी लाइट थी, जो कांग्रेस समर्थकों के द्वारा ही फोटो लेने के दौरान इस्तेमाल की गई थी।
वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने गृहमंत्री को लिखा, ''हरे रंग की लेजर लाइट से राहुल गांधी के सिर को निशाना बनाते हुए सात बार टारगेट किया गया। यह लाइट स्नाइपर गन से निकलने वाली लेजर की तरह ही प्रतीत हो रही थी। यह अलार्म है, जो हमें संभलने की चेतावनी दे रहा है।''
पत्र में राजीव और इंदिरा गांधी का भी जिक्र
कांग्रेस ने पत्र में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और इंदिरा गांधी (राहुल गांधी के पिता और दादी) की हत्या का जिक्र किया है। वायनाड सीट के बाद राहुल ने बुधवार को अपनी पारंपरिक सीट अमेठी से भी पर्चा भर दिया है। इससे पहले राहुल ने बहन प्रियंका गांधी वाड्रा, बहनोई रॉबर्ट वाड्रा और उनके दोनों बच्चों के साथ रोड शो किया।
राहुल की सुरक्षा को लेकर यूपी प्रशासन की बड़ी चूक
कांग्रेस ने इस घटना को उत्तर प्रदेश प्रशासन की ओर से एक बड़ी चूक बताया है। पार्टी ने केंद्र सरकार से मामले में शीघ्र कार्रवाई की मांग की है। गृह मंत्रालय को लिखे पत्र पर कांग्रेसी नेता अहमद पटेल, जयराम रमेश और रणदीप सिंह सुरजेवाला ने साइन किए हैं। पत्र में सरकार से कहा गया है कि किसी भी राजनीतिक मतभेद के बावजूद राहुल गांधी की सुरक्षा आपकी सरकार और मंत्रालय की पहली जिम्मेदारी है।
वोट करने के दौरान एक सवाल जो अक्सर मतदाता के मन में उठता है वह यह कि आखिर उसका वोट कितना सुरक्षित रहेगा और कोई दूसरा उसके नाम से फ़र्ज़ी वोट तो नहीं डालेगा.
इस शंका की पुष्टि के लिए चुनाव अधिकारी वोटर की उंगली पर वोट देने के साथ ही नीले रंग की स्याही लगा देते हैं. इस नीले रंग की स्याही को भारतीय चुनाव में शामिल करने का श्रेय देश के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन को जाता है.
उंगली पर लगी यह स्याही ही इस बात का प्रतीक होती है कि किसी व्यक्ति ने अपना वोट किया है या नहीं.
लोग स्याही लगी अपनी उंगली की तस्वीर फ़ेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर रहे हैं. इस बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनके मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस नीली स्याही को मिटाया जा सकता है.
यह स्याही दक्षिण भारत के में स्थित एक कंपनी में बनाई जाती है. मैसूर पेंट एंड वार्निश लिमिटेड (MVPL) नाम की कंपनी इस स्याही को बनाती है. साल 1937 में इस कंपनी की स्थापना हुई थी. उस समय मैसूर प्रांत के महाराज नलवाडी कृष्णराजा वडयार ने इसकी शुरुआत की थी.
वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने गृहमंत्री को लिखा, ''हरे रंग की लेजर लाइट से राहुल गांधी के सिर को निशाना बनाते हुए सात बार टारगेट किया गया। यह लाइट स्नाइपर गन से निकलने वाली लेजर की तरह ही प्रतीत हो रही थी। यह अलार्म है, जो हमें संभलने की चेतावनी दे रहा है।''
पत्र में राजीव और इंदिरा गांधी का भी जिक्र
कांग्रेस ने पत्र में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और इंदिरा गांधी (राहुल गांधी के पिता और दादी) की हत्या का जिक्र किया है। वायनाड सीट के बाद राहुल ने बुधवार को अपनी पारंपरिक सीट अमेठी से भी पर्चा भर दिया है। इससे पहले राहुल ने बहन प्रियंका गांधी वाड्रा, बहनोई रॉबर्ट वाड्रा और उनके दोनों बच्चों के साथ रोड शो किया।
राहुल की सुरक्षा को लेकर यूपी प्रशासन की बड़ी चूक
कांग्रेस ने इस घटना को उत्तर प्रदेश प्रशासन की ओर से एक बड़ी चूक बताया है। पार्टी ने केंद्र सरकार से मामले में शीघ्र कार्रवाई की मांग की है। गृह मंत्रालय को लिखे पत्र पर कांग्रेसी नेता अहमद पटेल, जयराम रमेश और रणदीप सिंह सुरजेवाला ने साइन किए हैं। पत्र में सरकार से कहा गया है कि किसी भी राजनीतिक मतभेद के बावजूद राहुल गांधी की सुरक्षा आपकी सरकार और मंत्रालय की पहली जिम्मेदारी है।
वोट करने के दौरान एक सवाल जो अक्सर मतदाता के मन में उठता है वह यह कि आखिर उसका वोट कितना सुरक्षित रहेगा और कोई दूसरा उसके नाम से फ़र्ज़ी वोट तो नहीं डालेगा.
इस शंका की पुष्टि के लिए चुनाव अधिकारी वोटर की उंगली पर वोट देने के साथ ही नीले रंग की स्याही लगा देते हैं. इस नीले रंग की स्याही को भारतीय चुनाव में शामिल करने का श्रेय देश के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन को जाता है.
उंगली पर लगी यह स्याही ही इस बात का प्रतीक होती है कि किसी व्यक्ति ने अपना वोट किया है या नहीं.
लोग स्याही लगी अपनी उंगली की तस्वीर फ़ेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर रहे हैं. इस बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनके मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस नीली स्याही को मिटाया जा सकता है.
यह स्याही दक्षिण भारत के में स्थित एक कंपनी में बनाई जाती है. मैसूर पेंट एंड वार्निश लिमिटेड (MVPL) नाम की कंपनी इस स्याही को बनाती है. साल 1937 में इस कंपनी की स्थापना हुई थी. उस समय मैसूर प्रांत के महाराज नलवाडी कृष्णराजा वडयार ने इसकी शुरुआत की थी.
Wednesday, April 3, 2019
मोदी ने कहा- कांग्रेस की तरह ही उसका घोषणापत्र भ्रष्ट-बेईमान, इसे ढकोसला पत्र कहना चाहिए
ईटानगर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट में चुनाव प्रचार करने पहुंचे। उन्होंने कहा कि एक परिवार ने 55 साल तक दावा किया, लेकिन ये फिर भी दावा नहीं कर सकते कि हिंदुस्तान के सारे काम पूरे कर दिए। मुझे तो पांच साल होने वाले हैं, लेकिन मैं इतना जरूर समाधान कर सकता हूं कि मैं हर चुनौतियों को चुनौती देने वाला इंसान हूं। मोदी आज पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी और कोलकाता में भी जनसभाएं करेंगे।
'आजादी के 7 दशक बाद अरुणाचल के सभी गांवों में बिजली पहुंची'
मोदी ने कहा, "आपके मजबूत विश्वास का ही नतीजा है कि आज अरुणाचल में शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर अनेक संस्थान बन रहे हैं। आजादी के 7 दशक बाद अरुणाचल के सभी गांवों तक बिजली पहुंचा पाए हैं, हर घर को रोशन कर पाए हैं। एक तरफ वे दल हैं, जिन्होंने कभी देश की आशाओं-आकांक्षाओं को नहीं समझा, जिन्होंने देश पर राज करने की नीयत से सत्ता पर कब्जा जमाए रखा। जबकि आपका ये चौकीदार, आपके सेवक की तरह काम कर रहा है।"
"इस बार आपकी सांस्कृतिक विरासत, परंपरा, आपके गौरव की रक्षा करने वालों और आपके परिधानों, आपकी परंपराओं का मजाक उड़ाने वालों, आपका अपमान करने वालों के बीच चुनाव है। ये अरुणाचल-नॉर्थ ईस्ट के विकास के लिए दिन रात एक करने वालों और दशकों तक नॉर्थ ईस्ट की उपेक्षा करने वालों का चुनाव है। इस बार का चुनाव वादों और इरादों के बीच का चुनाव है। ये संकल्प और साजिश के बीच का चुनाव है। ये भरोसे और भ्रष्टाचार के बीच का चुनाव है।"
'हम ईमानदारी से काम करने वाले लोग'
मोदी के मुताबिक, "हम सिर्फ एक वादा करके उसे दशकों तक लटकाए रखने वाले लोग नहीं हैं, बल्कि आपके जीवन को आसान बनाने के लिए पूरी ईमानदारी से काम करने वाले लोग हैं। इन लोगों (कांग्रेस) की तरह ही इनका घोषणापत्र भी भ्रष्ट होता है, बेइमान होता है, ढकोसलों से भरा होता है और इसलिए उसे घोषणापत्र नहीं ढकोसला पत्र कहना चाहिए। यह अरुणाचल प्रदेश के लोगों का ही सपोर्ट है कि हम यहां देश और राज्य में विकास कर सके। हमने सड़क, नेशनल हाईवे, रेलवे और हवाई साधन विकसित कर राज्य में आवागमन सुगम बनाने का काम किया है।"
आज ममता भी शुरू करेंगी प्रचार अभियान
मोदी को चुनौती देने के लिए राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी अपने अभियान को एक दिन पहले शुरू करने का फैसला किया है। आज वे उत्तरी बंगाल के दिनहटा में प्रचार करेंगी। लोकसभा सीटों के लिहाज से उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बाद पश्चिम बंगाल तीसरा सबसे बड़ा राज्य है। ऐसे में भाजपा यहां अपना वोट शेयर बढ़ाना चाहेगी। पिछले साल पार्टी ने पंचायत चुनाव और कुछ उपचुनावों में बेहतर प्रदर्शन किया था। इस बार पार्टी वही प्रदर्शन दोहराना चाहेगी। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने तो राज्य में 23 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है।
ममता को कोई नहीं सुनेगा
बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप घोष के मुताबिक, प्रधानमंत्री की रैली में इतनी भीड़ होने वाली है कि उत्तरी बंगाल के लोग भी सिलिगुड़ी जाने वाले हैं। ऐसे में ममता को सुनने के लिए जाएगा ही कौन?
'आजादी के 7 दशक बाद अरुणाचल के सभी गांवों में बिजली पहुंची'
मोदी ने कहा, "आपके मजबूत विश्वास का ही नतीजा है कि आज अरुणाचल में शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर अनेक संस्थान बन रहे हैं। आजादी के 7 दशक बाद अरुणाचल के सभी गांवों तक बिजली पहुंचा पाए हैं, हर घर को रोशन कर पाए हैं। एक तरफ वे दल हैं, जिन्होंने कभी देश की आशाओं-आकांक्षाओं को नहीं समझा, जिन्होंने देश पर राज करने की नीयत से सत्ता पर कब्जा जमाए रखा। जबकि आपका ये चौकीदार, आपके सेवक की तरह काम कर रहा है।"
"इस बार आपकी सांस्कृतिक विरासत, परंपरा, आपके गौरव की रक्षा करने वालों और आपके परिधानों, आपकी परंपराओं का मजाक उड़ाने वालों, आपका अपमान करने वालों के बीच चुनाव है। ये अरुणाचल-नॉर्थ ईस्ट के विकास के लिए दिन रात एक करने वालों और दशकों तक नॉर्थ ईस्ट की उपेक्षा करने वालों का चुनाव है। इस बार का चुनाव वादों और इरादों के बीच का चुनाव है। ये संकल्प और साजिश के बीच का चुनाव है। ये भरोसे और भ्रष्टाचार के बीच का चुनाव है।"
'हम ईमानदारी से काम करने वाले लोग'
मोदी के मुताबिक, "हम सिर्फ एक वादा करके उसे दशकों तक लटकाए रखने वाले लोग नहीं हैं, बल्कि आपके जीवन को आसान बनाने के लिए पूरी ईमानदारी से काम करने वाले लोग हैं। इन लोगों (कांग्रेस) की तरह ही इनका घोषणापत्र भी भ्रष्ट होता है, बेइमान होता है, ढकोसलों से भरा होता है और इसलिए उसे घोषणापत्र नहीं ढकोसला पत्र कहना चाहिए। यह अरुणाचल प्रदेश के लोगों का ही सपोर्ट है कि हम यहां देश और राज्य में विकास कर सके। हमने सड़क, नेशनल हाईवे, रेलवे और हवाई साधन विकसित कर राज्य में आवागमन सुगम बनाने का काम किया है।"
आज ममता भी शुरू करेंगी प्रचार अभियान
मोदी को चुनौती देने के लिए राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी अपने अभियान को एक दिन पहले शुरू करने का फैसला किया है। आज वे उत्तरी बंगाल के दिनहटा में प्रचार करेंगी। लोकसभा सीटों के लिहाज से उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बाद पश्चिम बंगाल तीसरा सबसे बड़ा राज्य है। ऐसे में भाजपा यहां अपना वोट शेयर बढ़ाना चाहेगी। पिछले साल पार्टी ने पंचायत चुनाव और कुछ उपचुनावों में बेहतर प्रदर्शन किया था। इस बार पार्टी वही प्रदर्शन दोहराना चाहेगी। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने तो राज्य में 23 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है।
ममता को कोई नहीं सुनेगा
बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप घोष के मुताबिक, प्रधानमंत्री की रैली में इतनी भीड़ होने वाली है कि उत्तरी बंगाल के लोग भी सिलिगुड़ी जाने वाले हैं। ऐसे में ममता को सुनने के लिए जाएगा ही कौन?
Thursday, March 21, 2019
होली पर भी हरकत: LoC पर पाक की फायरिंग में एक जवान शहीद, कश्मीर में 3 जगह मुठभेड़
होली के पर्व पर जहां पूरा भारतवर्ष जश्न मना रहा है, वहीं पाकिस्तान खुशी के इस मौके पर भी अपनी हरकत से बाज नहीं आ रहा है. एक तरफ जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) पर पाकिस्तानी जवानों ने संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है, जिसमें एक भारतीय सेना का जवान शहीद हो गया है. दूसरी तरफ बारामूला, सोपोर और बांदीपुरा में आतंकवादियों से सुरक्षाबलों की मुठभेड़ चल रही है. सोपोर में आतंकियों के ग्रेनेड हमले में तीन पुलिसकर्मी घायल हुए हैं.
उत्तरी कश्मीर के सोपोर में रफियाबाद के वारपोरा इलाके में एक ग्रेनेड हमले में SHO समेत 3 पुलिसकर्मी घायल हो गए. आतंकियों ने यह ग्रेनेड हमला उस वक्त किया जब इलाके में एक तलाशी अभियान चल रहा था. इसके कुछ मिनट बाद ही सोपोर कस्बे में भी आतंकवादियों ने सीआरपीएफ के एक कैंप पर धावा बोल दिया, लेकिन इस ग्रेनेड हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. हमले के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. पुलिस ने बताया कि कुछ आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने वारपोरा इलाके को घेर लिया और तलाशी अभियान चलाया.
सोपोर के वारपोरा के अलावा बारामूला के कलंतरा और बांदीपुरा के हाजिन में भी आतंकियों से सुरक्षाबलों की मुठभेड़ हुई. बारामूला के एसएसपी अब्दुल कय्यूम ने इंडिया टुडे को बताया कि कालांतरा में गुरुवार सुबह सर्च ऑपरेशन के दौरान आतंकियों से मुठभेड़ हुई. उन्होंने बताया कि आतंकियों के बारे में सूचना मिलने के बाद बुधवार शाम सर्च ऑपरेशन चलाया गया था, लेकिन खराब मौसम के चलते बुधवार को ऑपरेशन रोक दिया गया. इसके बाद सुबह के वक्त आतंकियों से सुरक्षाबलों का सामना हुआ. बांदीपुरा के हाजिन में आतंकियों से मुठभेड़ हुई है.
हालांकि, अब तक किसी भी आतंकी को ढेर करने में सुरक्षाबलों को कामयाबी नहीं मिली है. लेकिन पाकिस्तान के सीजफायर उल्लंघन में भारत ने अपना एक वीर सपूत यश पॉल खो दिया है. राइफलमैन पॉल जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री का हिस्सा थे. यश पॉल उधमपुर जिले के मनतलाई गांव के रहने वाले थे. 24 साल के यश पॉल शादी-शुदा थे. यश की शहादत के अलावा आतंकियों के हमले में तीन पुलिसकर्मी जख्मी हो गए हैं. फिलहाल, सुरक्षाबलों का सर्च ऑपरेशन चल रहा है.
अमेरिकी अधिकारी ने ये भी कहा कि पिछले कुछ दिनों में पाकिस्तान ने शुरुआती एक्शन लिए हैं, जिसमें आतंकी संगठनों की संपत्तियां जब्त की गई हैं और उनकी गिरफ्तारियां भी हुई हैं. पाकिस्तान ने जैश के कुछ प्रमुख ठिकानों को भी अपने कब्जे में लिया है. लेकिन हम इससे काफी ज्यादा एक्शन देखना चाहते हैं. अमेरिका ने पाकिस्तान से स्पष्ट कहा है कि पहले भी पाकिस्तान की तरफ से गिरफ्तारी जैसे कदम उठाए गए हैं, लेकिन बाद में इन आतंकियों को छोड़ दिया जाता है. यहां तक कि आतंक के आकाओं को पूरे देश में घूमने की भी इजाजत मिल जाती है. ऐसे में पाकिस्तान को अब एकदम ठोस कार्रवाई करनी होगी.
बालाकोट में भारतीय वायुसेना की कार्रवाई के बाद पाकिस्तान की ओर से उठाए गए कदमों के बारे में पूछे जाने पर व्हाइट हाउस के अधिकार ने कहा कि अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय देखना चाहता है कि आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस और निर्णायक कार्रवाई हो. अधिकारी ने कहा, 'अभी पाकिस्तान की ओर से उठाए गए कदमों को लेकर पूर्ण आकलन करना जल्दबाजी होगी. हाल के दिनों में पाकिस्तान ने कुछ शुरुआती कदम उठाए हैं. मसलन, कुछ आतंकी संगठनों की संपत्तियां जब्त की गई हैं और कुछ की गिरफ्तारी भी हुई हैं और जैश के कुछ ठिकानों को प्रशासन ने अपने कब्जे में लिया है. लेकिन इन कदमों के अलावा अभी पाकिस्तान की ओर से बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है.
बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान ने चुनाव लड़ने की खबरों पर विराम लगा दिया है. अभिनेता सलमान खान ने गुरुवार को ट्वीट कर कहा, ना चुनाव लड़ूंगा और ना किसी पार्टी का प्रचार करूंगा. सलमान खान ने एक तरह से सियासत से तौबा करते हुए कहा कि चुनाव लड़ने की अटकलों में कोई दम नहीं है.
उत्तरी कश्मीर के सोपोर में रफियाबाद के वारपोरा इलाके में एक ग्रेनेड हमले में SHO समेत 3 पुलिसकर्मी घायल हो गए. आतंकियों ने यह ग्रेनेड हमला उस वक्त किया जब इलाके में एक तलाशी अभियान चल रहा था. इसके कुछ मिनट बाद ही सोपोर कस्बे में भी आतंकवादियों ने सीआरपीएफ के एक कैंप पर धावा बोल दिया, लेकिन इस ग्रेनेड हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. हमले के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. पुलिस ने बताया कि कुछ आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने वारपोरा इलाके को घेर लिया और तलाशी अभियान चलाया.
सोपोर के वारपोरा के अलावा बारामूला के कलंतरा और बांदीपुरा के हाजिन में भी आतंकियों से सुरक्षाबलों की मुठभेड़ हुई. बारामूला के एसएसपी अब्दुल कय्यूम ने इंडिया टुडे को बताया कि कालांतरा में गुरुवार सुबह सर्च ऑपरेशन के दौरान आतंकियों से मुठभेड़ हुई. उन्होंने बताया कि आतंकियों के बारे में सूचना मिलने के बाद बुधवार शाम सर्च ऑपरेशन चलाया गया था, लेकिन खराब मौसम के चलते बुधवार को ऑपरेशन रोक दिया गया. इसके बाद सुबह के वक्त आतंकियों से सुरक्षाबलों का सामना हुआ. बांदीपुरा के हाजिन में आतंकियों से मुठभेड़ हुई है.
हालांकि, अब तक किसी भी आतंकी को ढेर करने में सुरक्षाबलों को कामयाबी नहीं मिली है. लेकिन पाकिस्तान के सीजफायर उल्लंघन में भारत ने अपना एक वीर सपूत यश पॉल खो दिया है. राइफलमैन पॉल जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री का हिस्सा थे. यश पॉल उधमपुर जिले के मनतलाई गांव के रहने वाले थे. 24 साल के यश पॉल शादी-शुदा थे. यश की शहादत के अलावा आतंकियों के हमले में तीन पुलिसकर्मी जख्मी हो गए हैं. फिलहाल, सुरक्षाबलों का सर्च ऑपरेशन चल रहा है.
अमेरिकी अधिकारी ने ये भी कहा कि पिछले कुछ दिनों में पाकिस्तान ने शुरुआती एक्शन लिए हैं, जिसमें आतंकी संगठनों की संपत्तियां जब्त की गई हैं और उनकी गिरफ्तारियां भी हुई हैं. पाकिस्तान ने जैश के कुछ प्रमुख ठिकानों को भी अपने कब्जे में लिया है. लेकिन हम इससे काफी ज्यादा एक्शन देखना चाहते हैं. अमेरिका ने पाकिस्तान से स्पष्ट कहा है कि पहले भी पाकिस्तान की तरफ से गिरफ्तारी जैसे कदम उठाए गए हैं, लेकिन बाद में इन आतंकियों को छोड़ दिया जाता है. यहां तक कि आतंक के आकाओं को पूरे देश में घूमने की भी इजाजत मिल जाती है. ऐसे में पाकिस्तान को अब एकदम ठोस कार्रवाई करनी होगी.
बालाकोट में भारतीय वायुसेना की कार्रवाई के बाद पाकिस्तान की ओर से उठाए गए कदमों के बारे में पूछे जाने पर व्हाइट हाउस के अधिकार ने कहा कि अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय देखना चाहता है कि आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस और निर्णायक कार्रवाई हो. अधिकारी ने कहा, 'अभी पाकिस्तान की ओर से उठाए गए कदमों को लेकर पूर्ण आकलन करना जल्दबाजी होगी. हाल के दिनों में पाकिस्तान ने कुछ शुरुआती कदम उठाए हैं. मसलन, कुछ आतंकी संगठनों की संपत्तियां जब्त की गई हैं और कुछ की गिरफ्तारी भी हुई हैं और जैश के कुछ ठिकानों को प्रशासन ने अपने कब्जे में लिया है. लेकिन इन कदमों के अलावा अभी पाकिस्तान की ओर से बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है.
बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान ने चुनाव लड़ने की खबरों पर विराम लगा दिया है. अभिनेता सलमान खान ने गुरुवार को ट्वीट कर कहा, ना चुनाव लड़ूंगा और ना किसी पार्टी का प्रचार करूंगा. सलमान खान ने एक तरह से सियासत से तौबा करते हुए कहा कि चुनाव लड़ने की अटकलों में कोई दम नहीं है.
Thursday, March 7, 2019
एक लड़की के तीन बॉयफ़्रेंड और तीनों से प्यार मुमकिन है?
24 साल की गरिमा तीन लड़कों से प्यार करती हैं और वो तीनों उनके बॉयफ़्रेंड हैं. ख़ास बात ये है कि गरिमा के तीनों बॉयफ़्रेंड्स एक-दूसरे को जानते हैं और सभी इन रिश्तों को लेकर सहज हैं.
अब सवाल ये है कि क्या कोई शख़्स एक ही वक़्त में तीन लोगों से प्यार कर सकता है?
गरिमा इसका जवाब 'हां' में देती हैं.
दरअसल वो जिस तरह के रिश्ते मे हैं उसे 'पॉलीएमरस रिलेशनशिप'(Polyamorous relationship) कहते हैं और ऐसे रिश्तों के चलन को पॉलीएमरी(Polyamory) के नाम से जाना जाता है.
भारत समेत अब दुनिया भर में लोग इस तरह के रिश्तों के बारे में खुलकर सामने आ रहे हैं.
क्या है 'पॉलीएमरस रिलेशनशिप'?
पॉलीएमरी (Polyamory) ग्रीक और लैटिन भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है. Poly (ग्रीक) और Amor (लैटिन). Poly का मतलब है कई या एक से ज़्यादा और Amor यानी प्रेम. यानी कि एक वक़्त में एक से ज़्यादा लोगों से प्यार करने का चलन.
पॉलीएमरी की एक सबसे बड़ी और ज़रूरी शर्त है- रिश्तों में ईमानदारी और पारदर्शिता. इस रिश्ते में शामिल हर पार्टनर एक दूसरे को अच्छी तरह जानते हैं और सबकी सहमति के बाद ही रिश्ता आगे बढ़ता है.
गरिमा और उनके प्रेमियों की कहानी, उन्हीं की ज़ुबानी
मैं तक़रीबन 13-14 साल की रही होऊंगी जब मुझे पहली बार प्यार हुआ. हम दोनों एक दूसरे के साथ काफ़ी ख़ुश थे. सब कुछ ठीक चल रहा था कि तभी मैं किसी और की तरफ़ आकर्षित होने लगी. लेकिन साथ ही मैं अपने पहले पार्टनर को भी नहीं छोड़ना चाहती थी. मगर ऐसा कैसे मुमकिन है कि एक लड़की के दो बॉयफ़्रेंड हों?
किशोरावस्था के कुछ साल मेरे लिए बेहद उलझन भरे और तकलीफ़देह थे. मैं गंभीर 'आइडेंटिटी क्राइसिस' (पहचान के संकट) से जूझ रही थी. मेरे कई जानने वालों ने मुझे 'चरित्रहीन' का तमग़ा तक दे दिया. कइयों ने कहा कि मुझे सेक्स की लत है और मुझे मनोचिकित्सक के पास जाना चाहिए.
मैं काउंसलर के पास भी गई. मेरी काउंसलर ने मुझे काफ़ी हद तक समझा लेकिन साथ ही ये कहा कि कोई लड़का ये कैसे स्वीकार कर सकता है कि उसकी गर्लफ़्रेड के कई और बॉयफ़्रेंड हों? काउंसलर की बातों ने मुझे एक बार फिर ग्लानि से भर दिया था.
इस बीच मैं पढ़ाई के लिए विदेश चली गई. वहां के माहौल ने मुझे ख़ुद को समझने में काफ़ी मदद की. वहां मैंने आधुनिक रिश्तों, सेक्स और इवोल्यूशन पर कई किताबें पढ़ीं. वहां मुझे अपने जैसे कई और लोग मिले जिन्होंने ख़ुद को स्वीकार किया था और वो ख़ुद पर शर्मिंदा नहीं थे.
साथी तो मिला लेकिन...
विदेश में ही मुझे एक अन्य व्यक्ति में अपना साथी मिला. वो उम्र में मुझसे काफ़ी बड़े और समझदार थे. मैंने उनसे अपने स्वभाव के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि उन्हें मेरे विचारों और ज़िंदगी जीने के तरीके से कोई परेशानी नहीं है.
हमें एक-दूसरे से प्यार था और हम ज़िंदगी को भरपूर जीने लगे. लेकिन तब सब कुछ बदल गया जब मैं किसी और के क़रीब जाने लगी. मेरे वो साथी सैद्धांतिक तौर पर तो 'पॉलीएमरी' से सहमत थे लेकिन जब ये असल रूप में उनके सामने आया तो वो इसे बर्दाश्त नहीं कर पाए.
उन्होंने मुझसे कुछ इस तरह की बातें करनी शुरू कर दीं, मसलन- क्या मेरे प्यार में कोई कमी है? क्या हमारा रिश्ता इतना कमज़ोर है? क्या हमारी सेक्स लाइफ़ अच्छी नहीं है जो तुम किसी और की तरफ़ आकर्षित होने लगी हो?
चूंकि मैं उन्हें सब कुछ पहले ही बता चुकी थी इसलिए अब मेरे पास उन्हें समझाने के लिए कुछ भी नहीं था. इस तरह हम धीरे-धीरे दूर होते चले गए.
जब ख़ुद को कहा, 'क़बूल है'
कुछ सालों बाद मैं वापस भारत आ गई. अब मेरे पास पॉलीएमरी के बारे में काफ़ी जानकारी इकट्ठी हो चुकी थी इसलिए मैंने इस बारे में और ज़्यादा पढ़ने के साथ-साथ रिसर्च करना शुरू किया.
वक़्त के साथ मुझे पता चला कि भारत में भी बहुत से लोग 'पॉलीएमरस' हैं. अब मैं व्यक्तिगत तौर पर कम से कम 100 ऐसे लोगों को जानती हूं जो ख़ुद को 'पॉलीएमरस' मानते हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर इसके लिए बाक़ायदा कम्युनिटी और सपोर्ट ग्रुप्स बना रखे हैं जहां वो खुल कर बात कर सकते हैं.
फ़ेसबुक पर एक ऐसा ही क्लोज़्ड ग्रुप है 'बेंगलुरु पॉलीऐमरी'. ये ग्रुप पॉलीएमरस लोगों के लिए मीटिंग्स, गेट-टुगेदर और स्पीड डेटिंग जैसे कार्यक्रम आयोजित करते हैं.
मैं भी उनके एक ऐसे ही इवेंट में गई और वहां जाकर मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ. मुझे ऐसा लगा जैसे मैं अकेली नहीं हूं. कुछ इस तरह मेरी ज़िंदगी वापस ट्रैक पर आने लगी.
अब सवाल ये है कि क्या कोई शख़्स एक ही वक़्त में तीन लोगों से प्यार कर सकता है?
गरिमा इसका जवाब 'हां' में देती हैं.
दरअसल वो जिस तरह के रिश्ते मे हैं उसे 'पॉलीएमरस रिलेशनशिप'(Polyamorous relationship) कहते हैं और ऐसे रिश्तों के चलन को पॉलीएमरी(Polyamory) के नाम से जाना जाता है.
भारत समेत अब दुनिया भर में लोग इस तरह के रिश्तों के बारे में खुलकर सामने आ रहे हैं.
क्या है 'पॉलीएमरस रिलेशनशिप'?
पॉलीएमरी (Polyamory) ग्रीक और लैटिन भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है. Poly (ग्रीक) और Amor (लैटिन). Poly का मतलब है कई या एक से ज़्यादा और Amor यानी प्रेम. यानी कि एक वक़्त में एक से ज़्यादा लोगों से प्यार करने का चलन.
पॉलीएमरी की एक सबसे बड़ी और ज़रूरी शर्त है- रिश्तों में ईमानदारी और पारदर्शिता. इस रिश्ते में शामिल हर पार्टनर एक दूसरे को अच्छी तरह जानते हैं और सबकी सहमति के बाद ही रिश्ता आगे बढ़ता है.
गरिमा और उनके प्रेमियों की कहानी, उन्हीं की ज़ुबानी
मैं तक़रीबन 13-14 साल की रही होऊंगी जब मुझे पहली बार प्यार हुआ. हम दोनों एक दूसरे के साथ काफ़ी ख़ुश थे. सब कुछ ठीक चल रहा था कि तभी मैं किसी और की तरफ़ आकर्षित होने लगी. लेकिन साथ ही मैं अपने पहले पार्टनर को भी नहीं छोड़ना चाहती थी. मगर ऐसा कैसे मुमकिन है कि एक लड़की के दो बॉयफ़्रेंड हों?
किशोरावस्था के कुछ साल मेरे लिए बेहद उलझन भरे और तकलीफ़देह थे. मैं गंभीर 'आइडेंटिटी क्राइसिस' (पहचान के संकट) से जूझ रही थी. मेरे कई जानने वालों ने मुझे 'चरित्रहीन' का तमग़ा तक दे दिया. कइयों ने कहा कि मुझे सेक्स की लत है और मुझे मनोचिकित्सक के पास जाना चाहिए.
मैं काउंसलर के पास भी गई. मेरी काउंसलर ने मुझे काफ़ी हद तक समझा लेकिन साथ ही ये कहा कि कोई लड़का ये कैसे स्वीकार कर सकता है कि उसकी गर्लफ़्रेड के कई और बॉयफ़्रेंड हों? काउंसलर की बातों ने मुझे एक बार फिर ग्लानि से भर दिया था.
इस बीच मैं पढ़ाई के लिए विदेश चली गई. वहां के माहौल ने मुझे ख़ुद को समझने में काफ़ी मदद की. वहां मैंने आधुनिक रिश्तों, सेक्स और इवोल्यूशन पर कई किताबें पढ़ीं. वहां मुझे अपने जैसे कई और लोग मिले जिन्होंने ख़ुद को स्वीकार किया था और वो ख़ुद पर शर्मिंदा नहीं थे.
साथी तो मिला लेकिन...
विदेश में ही मुझे एक अन्य व्यक्ति में अपना साथी मिला. वो उम्र में मुझसे काफ़ी बड़े और समझदार थे. मैंने उनसे अपने स्वभाव के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि उन्हें मेरे विचारों और ज़िंदगी जीने के तरीके से कोई परेशानी नहीं है.
हमें एक-दूसरे से प्यार था और हम ज़िंदगी को भरपूर जीने लगे. लेकिन तब सब कुछ बदल गया जब मैं किसी और के क़रीब जाने लगी. मेरे वो साथी सैद्धांतिक तौर पर तो 'पॉलीएमरी' से सहमत थे लेकिन जब ये असल रूप में उनके सामने आया तो वो इसे बर्दाश्त नहीं कर पाए.
उन्होंने मुझसे कुछ इस तरह की बातें करनी शुरू कर दीं, मसलन- क्या मेरे प्यार में कोई कमी है? क्या हमारा रिश्ता इतना कमज़ोर है? क्या हमारी सेक्स लाइफ़ अच्छी नहीं है जो तुम किसी और की तरफ़ आकर्षित होने लगी हो?
चूंकि मैं उन्हें सब कुछ पहले ही बता चुकी थी इसलिए अब मेरे पास उन्हें समझाने के लिए कुछ भी नहीं था. इस तरह हम धीरे-धीरे दूर होते चले गए.
जब ख़ुद को कहा, 'क़बूल है'
कुछ सालों बाद मैं वापस भारत आ गई. अब मेरे पास पॉलीएमरी के बारे में काफ़ी जानकारी इकट्ठी हो चुकी थी इसलिए मैंने इस बारे में और ज़्यादा पढ़ने के साथ-साथ रिसर्च करना शुरू किया.
वक़्त के साथ मुझे पता चला कि भारत में भी बहुत से लोग 'पॉलीएमरस' हैं. अब मैं व्यक्तिगत तौर पर कम से कम 100 ऐसे लोगों को जानती हूं जो ख़ुद को 'पॉलीएमरस' मानते हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर इसके लिए बाक़ायदा कम्युनिटी और सपोर्ट ग्रुप्स बना रखे हैं जहां वो खुल कर बात कर सकते हैं.
फ़ेसबुक पर एक ऐसा ही क्लोज़्ड ग्रुप है 'बेंगलुरु पॉलीऐमरी'. ये ग्रुप पॉलीएमरस लोगों के लिए मीटिंग्स, गेट-टुगेदर और स्पीड डेटिंग जैसे कार्यक्रम आयोजित करते हैं.
मैं भी उनके एक ऐसे ही इवेंट में गई और वहां जाकर मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ. मुझे ऐसा लगा जैसे मैं अकेली नहीं हूं. कुछ इस तरह मेरी ज़िंदगी वापस ट्रैक पर आने लगी.
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