Wednesday, May 22, 2019

Тереза Мэй согласилась на голосование о новом референдуме по "брекситу"

Премьер-министр Британии Тереза Мэй объявила, что согласна провести в Палате общин голосование о втором референдуме по "брекситу". Это - одна из уступок, при помощи которых премьр надеется все-таки провести через парламент трижды отвергнутое им соглашение о выходе из Евросоюза.

Премьер-министр Тереза Мэй во вторник объявила, что ее кабинет готов пойти на определенные компромиссы, чтобы убедить депутатов все-таки проголосовать за проект соглашения о выходе, и один из этих компромиссов - голосование по вопросу о том, проводить или не проводить новый референдум.

При этом, по словам Мэй, положение о референдуме будет включено в проект постановления парламента относительно соглашения с ЕС - то есть, премьер-министр таким образом приглашает противников выхода из ЕС, выступающих за второй референдум, одновременно проголосовать и за референдум, и за выход из Евросоюза на условиях, прописанных в соглашении.

"Я обращаюсь к тем депутатам, кто хочет провести второй референдум, чтобы утвердить соглашение с ЕС - для этого вам понадобится соглашение, и, сответственно, постановление об одобрении соглашения", - сказала Мэй.

Между тем большинство тех депутатов, что выступают за референдум, добиваются именно отмены "брексита": они надеются, что теперь британский народ, узнав, с какими трудностями связан "брексит", проголосует против выхода.

Тереза Мэй намерена предпринять четвертую попытку провести через парламент проект соглашения о выходе из ЕС на первой неделе июня.

После этого Мэй обещает, вне зависимости от исхода голосования, сообщить однопартийцам, когда она уйдет в отставку. Предполагается, что Мэй покинет посты главы Консервативной партии и премьер-министра в течение лета.

По мнению большинства британских комментаторов, шансы на прохождение проекта соглашения с ЕС в Палате общин с четвертой попытки крайне малы: оппозиция, с одной стороны, и жесткие брекзитеры-тори, с другой, не удовлетворятся предложенными компромиссами и все равно проголосуют против.

Последние несколько недель правительство Мэй вело переговоры с руководством главной оппозиционной партии, Лейбористской. Декларированной целью переговоров был поиск компромисса относительно выхода из Евросоюза, но на прошлой неделе они закончились ничем.

Thursday, April 25, 2019

तस्वीरों मेंः धमाकों के तीन दिन बाद श्रीलंका

ईस्टर संडे को हुए सीरियल बम धमाकों के बाद पूरे श्रीलंका में मातम पसरा हुआ है. कुमारी फर्नांडो ने सेंट सेबेस्टियन चर्च में हुए धमाकों में अपने दो बच्चों और पति को खो दिया.

बुधवार को हुए सामूहिक अंत्येष्टि में शवों को दफ़नाते समय उनका सब्र टूट गया.

चर्चों और होटलों में हुए आठ धमाकों में अबतक 359 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है जबकि 500 लोग घायल हुए हैं.

श्रीलंकाई प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने कहा कि इन विस्फ़ोटों से इस्लामिक स्टेट (आईएस) को जोड़ा जा सकता है.

धमाकों की ज़िम्मेदारी आईएस ने ली है लेकिन इसका कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं दिया है, जैसा कि वो करता रहा है.

और हमलों की आशंका में पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और नाके लगाकर वाहनों और लोगों की चेकिंग की जा रही है.

श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना ने सुरक्षा बल और पुलिस का पुनर्गठन करने का संकल्प लेते हुए बताया कि इस हमले को लेकर कोई चेतावनी पहले साझा नहीं की गई थी.

रॉरेन कैंपबेल और उके पति नील इवांस इन धमाकों में मारे गए आठ ब्रितानी नागरिकों में शामिल हैं. मृतकों में 38 नागरिक हैं.

भारत के 11 नागरिकों के मारे जाने की पुष्टि हुई है जिनमें जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) के कार्यकर्ता भी शामिल हैं.

धमाका इतना ज़बरदस्त था कि चर्च की छतें तक उड़ गईं. पुलिस ने बताया कि चर्चों और होटलों में हुए इन बम धमाकों में अब तक नौ में से आठ हमलावरों की पहचान कर ली गई है. यह भी बताया गया कि इनमें से एक महिला हैं और कोई भी हमलावर विदेशी नहीं है.

पुलिस ने अब तक 60 से अधिक संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया है. आगे किसी हमले को रोकने के लिए आपातकाल लगाया गया है.

कोलंबो के बौद्ध विहार में दिवंगत लोगों के लिए शांति प्रार्थना आयोजित की गई. इस घटना से पूरे दुनिया में शोक की लहर है और प्रर्थना सभाएं और कैंडल मार्च निकाले जा रहै हैं.

Thursday, April 11, 2019

कांग्रेस का आरोप- राहुल को लेजर लाइट से टारगेट किया; एसपीजी ने कहा- यह मोबाइल की लाइट थी

अमेठी. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को अमेठी से नामांकन भरा। नामांकन के बाद राहुल प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। इस दौरान उनके माथे पर कई बार हरे रंग की लाइट दिखाई पड़ी। कांग्रेस ने इसे सुरक्षा में बड़ी खामी करार दिया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अध्यक्ष को टारगेट किया जा रहा था। स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) के डायरेक्टर ने जांच के बाद गृह मंत्रालय को बताया कि यह मोबाइल की हरी लाइट थी, जो कांग्रेस समर्थकों के द्वारा ही फोटो लेने के दौरान इस्तेमाल की गई थी।

वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने गृहमंत्री को लिखा, ''हरे रंग की लेजर लाइट से राहुल गांधी के सिर को निशाना बनाते हुए सात बार टारगेट किया गया। यह लाइट स्नाइपर गन से निकलने वाली लेजर की तरह ही प्रतीत हो रही थी। यह अलार्म है, जो हमें संभलने की चेतावनी दे रहा है।''

पत्र में राजीव और इंदिरा गांधी का भी जिक्र
कांग्रेस ने पत्र में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और इंदिरा गांधी (राहुल गांधी के पिता और दादी) की हत्या का जिक्र किया है। वायनाड सीट के बाद राहुल ने बुधवार को अपनी पारंपरिक सीट अमेठी से भी पर्चा भर दिया है। इससे पहले राहुल ने बहन प्रियंका गांधी वाड्रा, बहनोई रॉबर्ट वाड्रा और उनके दोनों बच्चों के साथ रोड शो किया।

राहुल की सुरक्षा को लेकर यूपी प्रशासन की बड़ी चूक
कांग्रेस ने इस घटना को उत्तर प्रदेश प्रशासन की ओर से एक बड़ी चूक बताया है। पार्टी ने केंद्र सरकार से मामले में शीघ्र कार्रवाई की मांग की है। गृह मंत्रालय को लिखे पत्र पर कांग्रेसी नेता अहमद पटेल, जयराम रमेश और रणदीप सिंह सुरजेवाला ने साइन किए हैं। पत्र में सरकार से कहा गया है कि किसी भी राजनीतिक मतभेद के बावजूद राहुल गांधी की सुरक्षा आपकी सरकार और मंत्रालय की पहली जिम्मेदारी है।

वोट करने के दौरान एक सवाल जो अक्सर मतदाता के मन में उठता है वह यह कि आखिर उसका वोट कितना सुरक्षित रहेगा और कोई दूसरा उसके नाम से फ़र्ज़ी वोट तो नहीं डालेगा.

इस शंका की पुष्टि के लिए चुनाव अधिकारी वोटर की उंगली पर वोट देने के साथ ही नीले रंग की स्याही लगा देते हैं. इस नीले रंग की स्याही को भारतीय चुनाव में शामिल करने का श्रेय देश के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन को जाता है.

उंगली पर लगी यह स्याही ही इस बात का प्रतीक होती है कि किसी व्यक्ति ने अपना वोट किया है या नहीं.

लोग स्याही लगी अपनी उंगली की तस्वीर फ़ेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर रहे हैं. इस बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनके मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस नीली स्याही को मिटाया जा सकता है.

यह स्याही दक्षिण भारत के में स्थित एक कंपनी में बनाई जाती है. मैसूर पेंट एंड वार्निश लिमिटेड (MVPL) नाम की कंपनी इस स्‍याही को बनाती है. साल 1937 में इस कंपनी की स्थापना हुई थी. उस समय मैसूर प्रांत के महाराज नलवाडी कृष्णराजा वडयार ने इसकी शुरुआत की थी.

Wednesday, April 3, 2019

मोदी ने कहा- कांग्रेस की तरह ही उसका घोषणापत्र भ्रष्ट-बेईमान, इसे ढकोसला पत्र कहना चाहिए

ईटानगर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट में चुनाव प्रचार करने पहुंचे। उन्होंने कहा कि एक परिवार ने 55 साल तक दावा किया, लेकिन ये फिर भी दावा नहीं कर सकते कि हिंदुस्तान के सारे काम पूरे कर दिए। मुझे तो पांच साल होने वाले हैं, लेकिन मैं इतना जरूर समाधान कर सकता हूं कि मैं हर चुनौतियों को चुनौती देने वाला इंसान हूं। मोदी आज पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी और कोलकाता में भी जनसभाएं करेंगे।

'आजादी के 7 दशक बाद अरुणाचल के सभी गांवों में बिजली पहुंची'
मोदी ने कहा, "आपके मजबूत विश्वास का ही नतीजा है कि आज अरुणाचल में शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर अनेक संस्थान बन रहे हैं। आजादी के 7 दशक बाद अरुणाचल के सभी गांवों तक बिजली पहुंचा पाए हैं, हर घर को रोशन कर पाए हैं। एक तरफ वे दल हैं, जिन्होंने कभी देश की आशाओं-आकांक्षाओं को नहीं समझा, जिन्होंने देश पर राज करने की नीयत से सत्ता पर कब्जा जमाए रखा। जबकि आपका ये चौकीदार, आपके सेवक की तरह काम कर रहा है।"

"इस बार आपकी सांस्कृतिक विरासत, परंपरा, आपके गौरव की रक्षा करने वालों और आपके परिधानों, आपकी परंपराओं का मजाक उड़ाने वालों, आपका अपमान करने वालों के बीच चुनाव है। ये अरुणाचल-नॉर्थ ईस्ट के विकास के लिए दिन रात एक करने वालों और दशकों तक नॉर्थ ईस्ट की उपेक्षा करने वालों का चुनाव है। इस बार का चुनाव वादों और इरादों के बीच का चुनाव है। ये संकल्प और साजिश के बीच का चुनाव है। ये भरोसे और भ्रष्टाचार के बीच का चुनाव है।"

'हम ईमानदारी से काम करने वाले लोग'
मोदी के मुताबिक, "हम सिर्फ एक वादा करके उसे दशकों तक लटकाए रखने वाले लोग नहीं हैं, बल्कि आपके जीवन को आसान बनाने के लिए पूरी ईमानदारी से काम करने वाले लोग हैं। इन लोगों (कांग्रेस) की तरह ही इनका घोषणापत्र भी भ्रष्ट होता है, बेइमान होता है, ढकोसलों से भरा होता है और इसलिए उसे घोषणापत्र नहीं ढकोसला पत्र कहना चाहिए। यह अरुणाचल प्रदेश के लोगों का ही सपोर्ट है कि हम यहां देश और राज्य में विकास कर सके। हमने सड़क, नेशनल हाईवे, रेलवे और हवाई साधन विकसित कर राज्य में आवागमन सुगम बनाने का काम किया है।"

आज ममता भी शुरू करेंगी प्रचार अभियान

मोदी को चुनौती देने के लिए राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी अपने अभियान को एक दिन पहले शुरू करने का फैसला किया है। आज वे उत्तरी बंगाल के दिनहटा में प्रचार करेंगी। लोकसभा सीटों के लिहाज से उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बाद पश्चिम बंगाल तीसरा सबसे बड़ा राज्य है। ऐसे में भाजपा यहां अपना वोट शेयर बढ़ाना चाहेगी। पिछले साल पार्टी ने पंचायत चुनाव और कुछ उपचुनावों में बेहतर प्रदर्शन किया था। इस बार पार्टी वही प्रदर्शन दोहराना चाहेगी। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने तो राज्य में 23 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है।

ममता को कोई नहीं सुनेगा
बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप घोष के मुताबिक, प्रधानमंत्री की रैली में इतनी भीड़ होने वाली है कि उत्तरी बंगाल के लोग भी सिलिगुड़ी जाने वाले हैं। ऐसे में ममता को सुनने के लिए जाएगा ही कौन?

Thursday, March 21, 2019

होली पर भी हरकत: LoC पर पाक की फायरिंग में एक जवान शहीद, कश्मीर में 3 जगह मुठभेड़

होली के पर्व पर जहां पूरा भारतवर्ष जश्न मना रहा है, वहीं पाकिस्तान खुशी के इस मौके पर भी अपनी हरकत से बाज नहीं आ रहा है. एक तरफ जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) पर पाकिस्तानी जवानों ने संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है, जिसमें एक भारतीय सेना का जवान शहीद हो गया है. दूसरी तरफ बारामूला, सोपोर और बांदीपुरा में आतंकवादियों से सुरक्षाबलों की मुठभेड़ चल रही है. सोपोर में आतंकियों के ग्रेनेड हमले में तीन पुलिसकर्मी घायल हुए हैं.

उत्तरी कश्मीर के सोपोर में रफियाबाद के वारपोरा इलाके में एक ग्रेनेड हमले में SHO समेत 3 पुलिसकर्मी घायल हो गए. आतंकियों ने यह ग्रेनेड हमला उस वक्त किया जब इलाके में एक तलाशी अभियान चल रहा था. इसके कुछ मिनट बाद ही सोपोर कस्बे में भी आतंकवादियों ने सीआरपीएफ के एक कैंप पर धावा बोल दिया, लेकिन इस ग्रेनेड हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. हमले के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. पुलिस ने बताया कि कुछ आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने वारपोरा इलाके को घेर लिया और तलाशी अभियान चलाया.

सोपोर के वारपोरा के अलावा बारामूला के कलंतरा और बांदीपुरा के हाजिन में भी आतंकियों से सुरक्षाबलों की मुठभेड़ हुई. बारामूला के एसएसपी अब्दुल कय्यूम ने इंडिया टुडे को बताया कि कालांतरा में गुरुवार सुबह सर्च ऑपरेशन के दौरान आतंकियों से मुठभेड़ हुई. उन्होंने बताया कि आतंकियों के बारे में सूचना मिलने के बाद बुधवार शाम सर्च ऑपरेशन चलाया गया था, लेकिन खराब मौसम के चलते बुधवार को ऑपरेशन रोक दिया गया. इसके बाद सुबह के वक्त आतंकियों से सुरक्षाबलों का सामना हुआ. बांदीपुरा के हाजिन में आतंकियों से मुठभेड़ हुई है.

हालांकि, अब तक किसी भी आतंकी को ढेर करने में सुरक्षाबलों को कामयाबी नहीं मिली है. लेकिन पाकिस्तान के सीजफायर उल्लंघन में भारत ने अपना एक वीर सपूत यश पॉल खो दिया है. राइफलमैन पॉल जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री का हिस्सा थे. यश पॉल उधमपुर जिले के मनतलाई गांव के रहने वाले थे. 24 साल के यश पॉल शादी-शुदा थे. यश की शहादत के अलावा आतंकियों के हमले में तीन पुलिसकर्मी जख्मी हो गए हैं. फिलहाल, सुरक्षाबलों का सर्च ऑपरेशन चल रहा है.

अमेरिकी अधिकारी ने ये भी कहा कि पिछले कुछ दिनों में पाकिस्तान ने शुरुआती एक्शन लिए हैं, जिसमें आतंकी संगठनों की संपत्तियां जब्त की गई हैं और उनकी गिरफ्तारियां भी हुई हैं. पाकिस्तान ने जैश के कुछ प्रमुख ठिकानों को भी अपने कब्जे में लिया है. लेकिन हम इससे काफी ज्यादा एक्शन देखना चाहते हैं. अमेरिका ने पाकिस्तान से स्पष्ट कहा है कि पहले भी पाकिस्तान की तरफ से गिरफ्तारी जैसे कदम उठाए गए हैं, लेकिन बाद में इन आतंकियों को छोड़ दिया जाता है. यहां तक कि आतंक के आकाओं को पूरे देश में घूमने की भी इजाजत मिल जाती है. ऐसे में पाकिस्तान को अब एकदम ठोस कार्रवाई करनी होगी.

बालाकोट में भारतीय वायुसेना की कार्रवाई के बाद पाकिस्तान की ओर से उठाए गए कदमों के बारे में पूछे जाने पर व्हाइट हाउस के अधिकार ने कहा कि अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय देखना चाहता है कि आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस और निर्णायक कार्रवाई हो. अधिकारी ने कहा, 'अभी पाकिस्तान की ओर से उठाए गए कदमों को लेकर पूर्ण आकलन करना जल्दबाजी होगी. हाल के दिनों में पाकिस्तान ने कुछ शुरुआती कदम उठाए हैं. मसलन, कुछ आतंकी संगठनों की संपत्तियां जब्त की गई हैं और कुछ की गिरफ्तारी भी हुई हैं और जैश के कुछ ठिकानों को प्रशासन ने अपने कब्जे में लिया है. लेकिन इन कदमों के अलावा अभी पाकिस्तान की ओर से बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है.

बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान ने चुनाव लड़ने की खबरों पर विराम लगा दिया है. अभिनेता सलमान खान ने गुरुवार को ट्वीट कर कहा, ना चुनाव लड़ूंगा और ना किसी पार्टी का प्रचार करूंगा. सलमान खान ने एक तरह से सियासत से तौबा करते हुए कहा कि चुनाव लड़ने की अटकलों में कोई दम नहीं है.

Thursday, March 7, 2019

एक लड़की के तीन बॉयफ़्रेंड और तीनों से प्यार मुमकिन है?

24 साल की गरिमा तीन लड़कों से प्यार करती हैं और वो तीनों उनके बॉयफ़्रेंड हैं. ख़ास बात ये है कि गरिमा के तीनों बॉयफ़्रेंड्स एक-दूसरे को जानते हैं और सभी इन रिश्तों को लेकर सहज हैं.

अब सवाल ये है कि क्या कोई शख़्स एक ही वक़्त में तीन लोगों से प्यार कर सकता है?

गरिमा इसका जवाब 'हां' में देती हैं.

दरअसल वो जिस तरह के रिश्ते मे हैं उसे 'पॉलीएमरस रिलेशनशिप'(Polyamorous relationship) कहते हैं और ऐसे रिश्तों के चलन को पॉलीएमरी(Polyamory) के नाम से जाना जाता है.

भारत समेत अब दुनिया भर में लोग इस तरह के रिश्तों के बारे में खुलकर सामने आ रहे हैं.

क्या है 'पॉलीएमरस रिलेशनशिप'?
पॉलीएमरी (Polyamory) ग्रीक और लैटिन भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है. Poly (ग्रीक) और Amor (लैटिन). Poly का मतलब है कई या एक से ज़्यादा और Amor यानी प्रेम. यानी कि एक वक़्त में एक से ज़्यादा लोगों से प्यार करने का चलन.

पॉलीएमरी की एक सबसे बड़ी और ज़रूरी शर्त है- रिश्तों में ईमानदारी और पारदर्शिता. इस रिश्ते में शामिल हर पार्टनर एक दूसरे को अच्छी तरह जानते हैं और सबकी सहमति के बाद ही रिश्ता आगे बढ़ता है.

गरिमा और उनके प्रेमियों की कहानी, उन्हीं की ज़ुबानी
मैं तक़रीबन 13-14 साल की रही होऊंगी जब मुझे पहली बार प्यार हुआ. हम दोनों एक दूसरे के साथ काफ़ी ख़ुश थे. सब कुछ ठीक चल रहा था कि तभी मैं किसी और की तरफ़ आकर्षित होने लगी. लेकिन साथ ही मैं अपने पहले पार्टनर को भी नहीं छोड़ना चाहती थी. मगर ऐसा कैसे मुमकिन है कि एक लड़की के दो बॉयफ़्रेंड हों?

किशोरावस्था के कुछ साल मेरे लिए बेहद उलझन भरे और तकलीफ़देह थे. मैं गंभीर 'आइडेंटिटी क्राइसिस' (पहचान के संकट) से जूझ रही थी. मेरे कई जानने वालों ने मुझे 'चरित्रहीन' का तमग़ा तक दे दिया. कइयों ने कहा कि मुझे सेक्स की लत है और मुझे मनोचिकित्सक के पास जाना चाहिए.

मैं काउंसलर के पास भी गई. मेरी काउंसलर ने मुझे काफ़ी हद तक समझा लेकिन साथ ही ये कहा कि कोई लड़का ये कैसे स्वीकार कर सकता है कि उसकी गर्लफ़्रेड के कई और बॉयफ़्रेंड हों? काउंसलर की बातों ने मुझे एक बार फिर ग्लानि से भर दिया था.

इस बीच मैं पढ़ाई के लिए विदेश चली गई. वहां के माहौल ने मुझे ख़ुद को समझने में काफ़ी मदद की. वहां मैंने आधुनिक रिश्तों, सेक्स और इवोल्यूशन पर कई किताबें पढ़ीं. वहां मुझे अपने जैसे कई और लोग मिले जिन्होंने ख़ुद को स्वीकार किया था और वो ख़ुद पर शर्मिंदा नहीं थे.

साथी तो मिला लेकिन...
विदेश में ही मुझे एक अन्य व्यक्ति में अपना साथी मिला. वो उम्र में मुझसे काफ़ी बड़े और समझदार थे. मैंने उनसे अपने स्वभाव के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि उन्हें मेरे विचारों और ज़िंदगी जीने के तरीके से कोई परेशानी नहीं है.

हमें एक-दूसरे से प्यार था और हम ज़िंदगी को भरपूर जीने लगे. लेकिन तब सब कुछ बदल गया जब मैं किसी और के क़रीब जाने लगी. मेरे वो साथी सैद्धांतिक तौर पर तो 'पॉलीएमरी' से सहमत थे लेकिन जब ये असल रूप में उनके सामने आया तो वो इसे बर्दाश्त नहीं कर पाए.

उन्होंने मुझसे कुछ इस तरह की बातें करनी शुरू कर दीं, मसलन- क्या मेरे प्यार में कोई कमी है? क्या हमारा रिश्ता इतना कमज़ोर है? क्या हमारी सेक्स लाइफ़ अच्छी नहीं है जो तुम किसी और की तरफ़ आकर्षित होने लगी हो?

चूंकि मैं उन्हें सब कुछ पहले ही बता चुकी थी इसलिए अब मेरे पास उन्हें समझाने के लिए कुछ भी नहीं था. इस तरह हम धीरे-धीरे दूर होते चले गए.

जब ख़ुद को कहा, 'क़बूल है'
कुछ सालों बाद मैं वापस भारत आ गई. अब मेरे पास पॉलीएमरी के बारे में काफ़ी जानकारी इकट्ठी हो चुकी थी इसलिए मैंने इस बारे में और ज़्यादा पढ़ने के साथ-साथ रिसर्च करना शुरू किया.

वक़्त के साथ मुझे पता चला कि भारत में भी बहुत से लोग 'पॉलीएमरस' हैं. अब मैं व्यक्तिगत तौर पर कम से कम 100 ऐसे लोगों को जानती हूं जो ख़ुद को 'पॉलीएमरस' मानते हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर इसके लिए बाक़ायदा कम्युनिटी और सपोर्ट ग्रुप्स बना रखे हैं जहां वो खुल कर बात कर सकते हैं.

फ़ेसबुक पर एक ऐसा ही क्लोज़्ड ग्रुप है 'बेंगलुरु पॉलीऐमरी'. ये ग्रुप पॉलीएमरस लोगों के लिए मीटिंग्स, गेट-टुगेदर और स्पीड डेटिंग जैसे कार्यक्रम आयोजित करते हैं.

मैं भी उनके एक ऐसे ही इवेंट में गई और वहां जाकर मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ. मुझे ऐसा लगा जैसे मैं अकेली नहीं हूं. कुछ इस तरह मेरी ज़िंदगी वापस ट्रैक पर आने लगी.

Thursday, February 28, 2019

पाकिस्तान से नहीं चलेगी समझौता एक्सप्रेस

भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव का असर दोनों देशों के बीच चलने वाली ट्रेन सेवा पर पड़ा है.

सप्ताह में दो बार लाहौर से दिल्ली आने वाली समझौता एक्सप्रेस ट्रेन को फ़िलहाल रोक दिया गया है.

पाक्स्तान सरकार ने इसकी पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच तनाव के कारण फिलहाल अस्थाई रूप से समझौता एक्सप्रेस को रोक दिया गया है.

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है, "गुरुवार को ट्रेन नहीं चलेगी. भारत और पाकिस्तान के बीच सुरक्षा स्थिति बेहतर होने पर ट्रेन फिर से चलने लगी."

बीबीसी संवाददाता साजिद इक़बाल ने ट्वीट किया है कि ट्रेन सेवा अस्थायी तौर पर रोकी गई है और दोस्ती बस सेवा का भविष्य भी स्पष्ट नहीं है.

बीबीसी के सहयोगी रविंद्र सिंह रॉबिन ने बताया है कि लाहौर के स्टेशन मास्टर ने कहा है कि अगला आदेश ना मिलने तक लाहौर से समझौता एक्सप्रेस नहीं चलेगी.

उनका कहना है कि ट्रेन रद्द होने के कारण लाहौर से भारत आने वाले कई यात्री लाहौर रेलवे स्टेशन में फंस गए हैं. वहीं भारत में पड़ने वाले अटारी में भी कई यात्री फंस गए हैं.

रॉबिन का कहना है कि लाहौर में फंसे यात्रियों को उम्मीद है कि भारत उनके लौटने के लिए जल्द उचित व्यवस्था कराएगा.

हालांकि ट्रेन रोकने का आदेश किस तरफ़ से आया है और क्यों, इस बारे में अब तक कोई पुख़्ता जानकारी नहीं है.

रॉबिन ने भारत और पाकिस्तान दोनों तरफ़ से स्टेशन अधिकारियों से बात की है. वो बताते हैं कि दोनों ही तरफ़ से अधिकारी इसके लिए सीमा पार के अधिकारियों को दोषी बता रहे हैं.

भारत ने ट्रेन रोकने से किया इनकार
अटारी रेलवे स्टेशन मास्टर एके गुप्ता कहते हैं कि यहां पर स्थिति सामान्य है.

उनका कहना है, "गुरुवार को दिल्ली से अटारी पहुंचने वाली समझौता एक्सप्रेस अपने सही समय पर अटारी पहुंची है. लेकिन सवेरे हमें वाघा सीमा से जानकारी मिली है कि दूसरी तरफ़ से समझौता एक्सप्रेस किसी कारण से कैंसल कर दी गई है."

"इस ट्रेन में क़रीब 40 यात्री पाकिस्तान से हैं. अब यहां से सड़क के रास्ते पाकिस्तान भेजने के लिए व्यवस्था की जा रही है. आदेश मिलने पर तुरंत पालन किया जाएगा."

बुधवार को इस संबंध में रेलमंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि समझौता एक्सप्रेस दिल्ली के अटारी तक सामान्य तौर पर जाएगी.

बुधवार को आंध्र प्रदेश के लिए नए रेलवे जोन की घोषणा के दौरा पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "समझौता एक्सप्रेस का संचालन रोके जाने के बारे में किसी तरह के आधिकारिक निर्देश नहीं मिले हैं."

समझौता एक्सप्रेस भारत और पाकिस्तान के बीच शिमला समझौते के बाद जून, 1976 में शुरू की गई थी.

साल 2001 में संसद पर हमले के बाद यह ट्रेन सेवा रोक दी गई थी लेकिन 2004 में इसे फिर शुरू किया गया.

पुलवामा में सीआरपीएफ़ के क़ाफ़िले पर हुए हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बाद अब समझौता एक्सप्रेस रोके जाने की ख़बरें आ रही है.

冠状病毒“政治危机”和后疫情世界:BBC专访历史学家赫拉利

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